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Harsiddhi mata koyla dungar – आज हम इस आर्टिकल में एक ऐसे मंदिर की बात करने वाले है जिसे कहा जाता है की पहाड़ी के ऊपर मूल मंदिर को श्री कृष्ण ने खुद बनाया है।

तो आइये दोस्तों थोड़ा विस्तार से जानते है।

harsiddhi mata koyla dungar

Image Credit : Wikimedia ( DKGohil)

हर्षद माता को यहाँ की क्षेत्रीय भाषा में हरसिद्धि देवी या माता के नाम से भी जाना जाता है।

हरसिद्धि एक क्षेत्रीय हिंदू देवी है।

वह कई क्षत्रिय, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समुदायों द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं।

वह मछुआरों और अन्य समुद्री-पालन करने वाली जनजातियों और गुजरात के लोगों द्वारा धार्मिक रूप से पूजा की जाती है क्योंकि उन्हें समुद्र में जहाजों का रक्षक माना जाता है।

Harshad mata mandir - हर्षद माता मंदिर

हरसिद्धि माता मंदिर को पोरबंदर एन मार्ग से लगभग 30 किमी दूर द्वारका में गाँधी गाँव में स्थित हर्षल माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

मुख्य मंदिर मूल रूप से समुद्र के सामने एक पहाड़ी पर स्थित था।

हरसिद्धि माता मंदिर द्वारका रोड पर पोरबंदर से 45 किलोमीटर दूर स्थित है और एक प्रसिद्ध स्थानीय तीर्थस्थल है।

सोमनाथ-द्वारका मार्ग पर अतिथि रुकते हैं।

आश्चर्यजनक अरबी समुद्र के नज़ारों वाली एक पहाड़ी पर मंदिर का स्थान इसे एक लोकप्रिय पड़ाव बनाता है।

यह मंदिर द्वारका से करीब 100 किमी की दूरी पर है।

HarshadMata Mandir History - हर्षद माता मंदिर इतिहास..

ऐसा कहा जाता है कि कृष्ण ने अपने जीवनकाल में उनकी पूजा की थी और तब से कोयला डूंगर नाम की पहाड़ी पर रह रहे हैं।

पहाड़ी के ऊपर मूल मंदिर को कृष्ण ने खुद बनाया है। 

कृष्ण असुरों और जरासंध को हराना चाहते थे इसलिए उन्होंने अम्बा माता से शक्ति की प्रार्थना की।

देवी के आशीर्वाद से, कृष्ण असुरों को हराने में सक्षम थे। इस सफलता के बाद, उन्होंने मंदिर का निर्माण किया। 

जब जरासंध मारा गया, तो सभी यादवों ने यहां अपनी सफलता का जश्न मनाया।

इसलिए इस जगह को हर्षद माता या हरसिद्धि माता के नाम से जाना जाता है।

मंदिर से जुड़ी वार्ता..

देवी का मंदिर पहाड़ी पर स्थित था। यह माना जाता था कि यदि देवी की दृष्टि जहाज पर गिरती है, तो वह जल जायेगा या समुद्र में बर्बाद हो जायेगा।

जगडू नाम का एक व्यापारी था जिनके जहाजों का बेड़ा इसके कारण बर्बाद हो गया लेकिन वह बच गया।

जगडू मंदिर गए और देवी को प्रसन्न करने के लिए तीन दिनों तक उपवास रखा।

वह प्रकट हुई और जगडू ने उसे पहाड़ी पर से उतरने के लिए मना लिया, ताकि उसकी नजर जहाजों पर न पड़े।

माता ने एक शर्त रखी की पहाड़ तक जाने वाली सीडी के हर एक कदम पर यदि वह पशु की बलिदान देता, तो वह उसके अनुरोध पर वहाँ बिराजने पर सहमत हो जाती।

जगडू जैन धर्म का अनुयायी होने के कारण हैरान था, वह अहिंसा में विश्वास करता था।

अपनी बात रखने के लिए,जगडू ने भैंसें लाईं और बलि दी लेकिन संख्या कम हो गई और देवी नए मंदिर स्थल से कुछ कदम दूर थीं।

इसलिए उसने अपना और अपने परिवार का बलिदान करने का फैसला किया।

अपने परिवार की भक्ति के ऊपर माता प्रसन्न हुवे और उनको वापिस जिन्दा किया।

उसने यह भी वरदान दिया कि उसकी कीर्ति कभी नहीं काम होगी।

एक और प्रसिद्ध मंदिर उज्जैन में स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था।

कहा जाता है कि विक्रमादित्य ने मियाणी में कोयला डूंगर का दौरा किया था, जिसे तब मीनलपुर के रूप में जाना जाता था, जो चावड़ा वंश के प्रभातसेन चावड़ा द्वारा शासित एक बंदरगाह शहर था। विक्रमादिया देवी का आशीर्वाद था।

उन्होंने हरसिद्धि माता से अनुरोध किया, कि वह उनके उज्जैन राज्य में आएं, जहां वह उनकी रोजाना पूजा करेंगे। उसे वहानवटी माता के नाम से भी जाना जाता है।

Harsiddhi mata koyla dungar

हर्षद माता दर्शन और आरती के समय..

Darshan Timings :

  • 5 Am – 9 Pm

Arti Timings :

  • सुबह 9 बजे
  • शाम 6:30 बजे 

हर्षद माता मंदिर प्रवेश शुल्क..

Free

Places to Visit Near Harshad mata

मैंने इन सभी जगहों के बारे में विस्तार से आर्टिकल लिखे हुवे है आप उसे नाम के ऊपर क्लिक करके जरूर से पढ़ें।

Conclusion - निष्कर्ष

यह आर्टिकल मैंने खुद के अनुभव की मदद से लिखा हुवा है।

अगर आप इस मंदिर के बारे में और भी ज्यादा जानकारी रखते हो तो यहाँ पर कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर कीजिये जिससे यहाँ पर घूमने आने वाले यात्रिको को इस जगह के बारे में और भी अच्छी जानकारी मिल सके जो हमारा इस आर्टिकल लिखने का मुख्य उदेश्य भी है।

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आशा करता हूँ की आप को आर्टिकल में दी गई जानकारी यहाँ पर घूमने आने के समय जरूर से मदद करेगी। 

अपना कीमती समय इस आर्टिकल को देने के लिए आपका धन्यवाद।


dharmesh

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