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Somnath mandir kaise pahunche – सोमनाथ में स्थापित सोमनाथ मंदिर भगवान शंकर के १२ ज्योतिर्लिंग में से पहेला है।

सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे,क्या देखें उसके बारे में आओ विस्तार से आज बात करते है।

दर्शन के बारे में अगत्य की जानकारी : 

सोमनाथ ट्रस्ट और कलेक्टर के बिच हुई बैठक में यह डिसाइड हुवा है की भगवान शिव के दर्शन के लिए अगला निर्देश न दिया जाये तब तक आप को फरजियात ऑनलाइन पास लेना पड़ेगा। 

वेरावल के भक्तों के आलावा यहाँ आने वाले देश के सभी भक्तों को ट्रस्ट की ऑफिसियल वेबसाइट पर पहले रजिस्ट्रशन करवाना होगा।

और उसके बाद ही वह भगवान शिव के दर्शन कर सकेंगे।

वेरावल के भक्तों के लिए यहाँ पर एक काउंटर बनाया हुवा है वहां से पास लेना अनिवार्य होगा।

Somnath Temple - सोमनाथ मंदिर

Image Credit : Wikipedia

दर्शन के समय : 

कोविड महामारी के चलते दर्शन समय में कुछ बदलाव किये गए है।

जो कुछ इस तरह से है…

  • सुबह दर्शन : 7:30 – 11:30
  • दोपहर दर्शन : 12:30 – 6:30
  • शाम को दर्शन : 7:30 – 10:00
  • आरती के समय : सुबह 7 बजे, दोपहर को 12 बजे और शाम को 7 बजे। 

Note :  कोरोना महामारी की वजह से सभी आरतियों में भक्तजनों का जो प्रवेश बंद किया गया था अब वो हटा लिया गया है। 

6 फरवरी से सभी आरतियों में भक्तों को प्रवेश मिलेगा लेकिन कोई मंदिर में खड़ा नहीं रह सकेगा। 

सोसियल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुवे चलते रहना होगा और चलते चलते ही भोलेनाथ की आरती के दर्शन किये जा सकेंगे। 

जय सोमनाथ साउंड एंड लाइट शॉ : शाम को 8 बजे से 9 बजे।

लगभग एक घंटे का शो,टिकट की कीमत..

  • प्रति व्यक्ति : 25/-  और 
  • आधा टिकट : 15 /-  है। 

यह शो पौराणिक कहानी और स्थानों के महत्व के बारे में बताता है।

यह प्रवासी तीर्थ के बारे में बताता है जहां भगवान कृष्ण अपना नश्वर शरीर छोड़कर स्वर्ग लौट गए।

Note : कोविड महामारी के चलते यह शॉ बंद था जिसे अब 15 अक्टूबर से श्रद्धालुओं के लिए वापिस खोल दिया गया है।

जिसमे श्रद्धालुओं को सोसियल डिस्टन्सिंग का पालन अवश्य करना पड़ेगा।

यह मंदिर मंदिर के सभी कोनों से विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करता है।

सभी भक्तों को मुख्य परिसर में प्रवेश करने से पहले सुरक्षा जांच से गुजारा जाता है।

मंदिर के अंदर मोबाइल,कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मान्य नहीं।

Where is Somnath Temple Situated - सोमनाथ मंदिर कहाँ पर स्थित है ?

सोमनाथ मंदिर भारत के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र के वेरावल के प्रभास पाटन में स्थित है।

भगवान शिव के कुल 12 ज्योतिर्लिंग है जिसमे से गुजरात में कुल 2 ज्योतिर्लिंग स्थित है।

पहला ज्योतिर्लिंग यहाँ सोमनाथ में स्थापित है और दूसरा जो द्वारका के पास आया हुवा नागेश्वर ज्योतिर्लिं 10 वे नंबर का है। 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में अलग से एक ब्लॉग बनाया हुवा है जिसमे हमने नागेश्वर महादेव  के बारे में विस्तार से बात की है मैंने जिसकी लिंक इस आर्टिकल में दी हुई है आप उसे भी पढ़ सकते हो।

लिंक : नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 

अगर आप गुजरात बहार से हो और गुजरात घूमने आ रहे हो तो आप ये दोनों ज्योतिर्लिंग के दर्शन साथ में ही कर सकते हो। 

कैसे वो हम इसी ब्लॉग में ही आगे बात करते है।

Somnath mandir kaise pahunche in Hindi

सोमनाथ मंदिर ..

सोमनाथ मंदिर का पौराणिक महत्व ..

Somnath temple/somnath mandir kaise Pahunche. ​

Image Credit : Wikipedia

पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है की यह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना खुद चंद्र देव ने की थी।

सोमनाथ का मतलब सोम यानि चंद्र के नाथ। 

इस लिए इसे सोमेश्वर भी कहा जाता है। सोमेश्वर का मतलब चंद्र के स्वामी।

पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्र ने दक्षप्रजापति राजा की 27 कन्याओं से विवाह किया था।

जिसमे से चंद्र देव उनकी पहली पत्नी रोहिणी से बाकि पत्निओ से अधिक प्यार करते थे।

दक्षप्रजापति को यह देखकर बहोत ही बुरा लगा और वो क्रोधित हो गये और उन्होंने चंद्र देव को श्राप दे दिया कि तुम्हे अपने रूप पे बहोत घमंड है तो अब से हर दिन तुम्हारा तेज क्षीण होता रहेगा।

अभिशाप की वजह से चाँद ने अपनी रौनक खो दी थी।

श्राप से विचलित और दुःखी सोम ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी।

अंततः शिव प्रसन्न हुए और चंद्र के श्राप का निवारण किया।

सोम के कष्ट को दूर करने के बाद भगवान शिव ने यहां ज्योतिर्लिंग के रूप मे स्थापित हुये और उनका नामकरण ‘सोमनाथ’ हुआ।

यह मंदिर तब अत्यंत वैभवशाली था जिसकी वजह से इतिहास में कई बार यह मंदिर लूटा गया, निजी स्वार्थ के कारन कई बार तोड़ा गया तथा कई अच्छे राजाओं के द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था।

सर्वप्रथम एक मंदिर ईसा पूर्व में अस्तित्व में था जिस जगह पर द्वितीय बार मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया।

आठवीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर अल-जुनेद 725 ईस्वी में इसे नष्ट करने का प्रयत्न किया लेकिन इसका कोई ऎतिहासिक गवाह नहीं है।

गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट द्वितीय ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया।

इस मंदिर को लाल पत्थरों से बनाया गया था जिसकी वजह से इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी।

अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन 1024 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया।

इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया।

सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया दिया गया।

मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया।

सोमनाथ मंदिर का पुनःनिर्माण कब हुवा ?

इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

मंदिर का बार बार खंडन और जीर्णोद्धार होता रहा पर शिवलिंग यथावत रहा।

सोमनाथजी के मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के आधीन है।

सरकार ने ट्रस्ट को जमीन,बाग-बगीचे देकर आय का प्रबन्ध किया है।

यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है।

चैत्र,भाद्रपद,कार्तिक माह में यहां श्राद्ध करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बडी भीड़ लगती है।

इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण,कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है।

इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

जो लोग हिन्दू धर्म के नहीं है उसे मंदिर में दर्शन हेतु जाने के लिए विशेष परमिशन लेनी पड़ेगी। 

उनको मंदिर में जाने के लिए ट्रस्ट को मान्य कारण बताना पड़ेगा।

ट्रस्ट की परमिशन के बाद ही उनको मंदिर में जाने दिया जायेगा।

सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। 

सोमनाथ का मन्दिर जिस स्थान पर स्थित है उसे प्रभास या प्रभासपाटण आदि नामों से जाना जाता है।

मंदिर प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है, जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बड़ा ही सुंदर सचित्र वर्णन किया जाता है।

लोककथाओं के अनुसार यहीं प्रभास पाटण में श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था।

इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।

मैंने वह स्थान के बारे में एक अलग से आर्टिकल लिखा हुवा है आप उसे दी गई लिंक पर जाके विस्तार से पढ़ सकते हो।

ज्यादा पढ़ें : भालका तीर्थ 

How to reach Somnath Temple ? - सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे ?

सोमनाथ जाने के लिए बस एक बहुत ही आसान और सुविधाजनक विकल्प है।

पौराणिक महत्व होने की वजह से कई राज्य परिवहन बसें और निजी बसें हैं जो नियमित अंतराल पर चलती हैं।

भारत के सभी प्रमुख शहरों के लिए इसकी नियमित बसें हैं।

लग्जरी बसें,नॉन-एसी और एसी बसें उपलब्ध हैं, जिन्हें आप अपने बजट के अनुसार चुन सकते हैं।

दीव से सोमनाथ लगभग 85 किमी दूरी पर है।

जहाँ बस से करीब 2 से 2.5 घंटे में आप सोमनाथ पहुँच जाओगे।

वेरावल से सोमनाथ महज 6 किमी की दूरी पर है। 15 से 20 मिनिट में आप सोमनाथ पहुँच जावोगे।

अहमदाबाद से करीब 420 किमी जो करीब 8 घंटे बस के सफर के बाद आप सोमनाथ पहोंचोगे।

सोमनाथ रेलवे स्टेशन भावनगर डिवीजन के पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत आता है। 

जबलपुर जंक्शन,अहमदाबाद जंक्शन,राजकोट जंक्शन,ओखा और पोरबंदर के लिए एक दैनिक ट्रेन यहाँ से चलती है।

नजदीकी शहरों से रोजाना सोमनाथ ले जाने वाली ट्रैन्स। 

  • सोमनाथ रेल्वे स्टेशन (SMNH).
  • अहमदाबाद -सोमनाथ इंटरसिटी एक्सप्रेस 
  • राजकोट – सोमनाथ पैसेंजर 
  • पोरबंदर-सोमनाथ पैसेंजर 
  • ओखा-सोमनाथ एक्सप्रेस 

रेलवे स्टेशन से महज 1.5 किमी की दूरी पर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग आया हुवा है जहाँ पर आप टेक्सी या लोकल वाहन से आसानी से सोमनाथ मंदिर पहुँच सकते है।

अगर आप द्वारका दर्शन के लिए गए हो तो आप ने वहां नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किये ही होंगे तो वहां से अगर आप सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भी पहुँच सको तो इससे बेहतर क्या होगा ? 

द्वारका से एक ट्रैन रोजाना सोमनाथ के लिए आती है जो आपको सीधा द्वारका ज्योतिर्लिंग पहुंचा देगी। और वो ट्रैन रात को ही चलती है तो आप अपना एक दिन भी बचा सकोगे।

द्वारका से सोमनाथ रूट पर चलने वाली सबसे तेज ट्रेन 19252 ओखा सोमनाथ एक्स्प्रेस है। 

यह द्वारका से रात को  20:33:00 बजे प्रस्थान करती है और सुबह 05:30 बजे सोमनाथ पहुंचती है। 

ट्रेन 413 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसका किराया महज 250 रूपये है।

हवाई मार्ग से सोमनाथ की यात्रा को अंतिम विकल्प माना जा सकता है क्योंकि सोमनाथ के लिए नियमित उड़ानें नहीं हैं।

इस जगह का अपना सोमनाथ हवाई अड्डा नहीं है।

  • 85 किमी दूर -दीव एयरपोर्ट (DIU), दीव, दमन और दीव
  • 150 किमी दूर-पोरबंदर एयरपोर्ट (PBD), पोरबंदर, गुजरात
  • 200 किमी दूर-राजकोट एयरपोर्ट (RAJ), राजकोट, गुजरात 
  • 420 किमी दूर-अहमदाबाद एयरपोर्ट(अब्द),अहमदाबाद, गुजरात 

सुन्दर हरियाली से भरे सड़क मार्ग से सोमनाथ की यात्रा करना एक विकल्प है।

सोमनाथ, जिसे वन्यजीवों और राष्ट्रीय उद्यानों के लिए भी जाना जाता है।

कार से सोमनाथ की यात्रा करने से आप इस जगह के आसपास अपना समय निकाल सकते हैं।

सोमनाथ कार किराए पर लेने की सेवाओं को सभी प्रमुख शहरों से या सोमनाथ के भीतर से भी बुक किया जा सकता है।

Somnath Mandir Kaise Pahunche in Hindi

Somnath Weather

में यहाँ पर वेदर जानने के लिए लिंक दे रहा हूँ आप उसे उसे करके लाइव वेदर चेक कर सकते हो।

Somnath Weather

Where to stay in somnath - सोमनाथ में कहाँ पर रुके ?

सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा रखा गया एक परिसर है और आप आवास के लिए ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।

संकरी गलियों में मंदिर के करीब कई बजट होटल उपलब्ध हैं।

आप यहां से मंदिर तक पैदल जा सकते हैं। सभी होटलों में पहचान प्रमाण आवश्यक है।

होटल आपके पहचान प्रमाण की एक प्रति अपने पास रखेगा।

इसके आलावा निचे दी गयी लिंक से आप डायरेक्ट होटल सर्च कर सकेंगे।

Places to visit near Somnath - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के आस पास देखने लायक जगह कौन सी है ?

अगर आप सोमनाथ घूमने का सोच रहे हो तो यहाँ सोमनाथ मुख्य मंदिर के आलावा भी बहोत सारी जगहें है जिसे आप अपने फॅमिली के साथ अच्छे से घूम सकते हो।

सोमनाथ में घूमने लायक सारी जगहों के बारे में मैंने एक पूरा आर्टिकल विस्तार से लिखा हुवा है अगर आप चाहो तो निचे दी गई लिंक पर जाके वहां के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

Read more : सोमनाथ में घूमने लायक जगहें.. 

Conclusion - निष्कर्ष

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना अपने आप में एक अलौकिक अनुभव है।

जीवन में एक बार यह अनुभव जरूर से करना चाहिए।

दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो आप लाइक और अपने दोस्तों से शेयर कर सकते है। 

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आप का अमूल्य समय इस ब्लॉग को देने के लिए आपको तहे दिल से धन्यवाद।

ॐ नमः शिवाय।


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8 Comments

Umeshwar Singh · January 11, 2021 at 2:02 pm

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Nehal · August 29, 2021 at 1:30 pm

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